स्वागत है आपका भारत के सबसे बड़े फ्री एजुकेशन पोर्टल पर। यहां आपको Hindi Vyakaran – सम्पूर्ण हिंदी व्याकरण – Hindi Grammar से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी दी गयी है जैसे: हिंदी व्याकरण की परिभाषा, भेद, पाठ्य सामग्री, हिंदी व्याकरण से सम्बंधित महत्वपूर्ण प्रश्न इत्यादि सभी का समावेश किया गया है।
हिंदी व्याकरण के अध्याय
हिंदी व्याकरण से संबंधित विषयों के नोट्स जैसे भाषा, वर्णमाला, संज्ञा, सर्वनाम, संधि, समास, पर्यायवाची, मुहावरे, रस, छंद, अलंकार, कारक, शब्द आदि। Hindi की प्रतियोगी परीक्षाओं से सम्बंधित Hindi Grammar के महत्वपूर्ण विषयों पर notes निम्न हैं:
संज्ञा | कारक |
सर्वनाम | वाक्य विचार |
विशेषण | वाच्य |
क्रिया | काल |
शब्द | अविकारी शब्द |
क्रिया विशेषण | मुहावरे |
संधि | लोकोक्तियाँ |
लिंग | वर्ण विचार |
वचन | विराम चिन्ह |
समास | वाक्यांश के लिए एक शब्द |
उपसर्ग | पारिभाषिक शब्दावली |
प्रत्यय | कारक चिन्ह |
अनेकार्थी शब्द | विलोम शब्द |
तत्सम शब्द | तद्भव शब्द |
एकार्थक शब्द | अन्य सभी लेख |
हिन्दी भाषा एवं व्याकरण का सामान्य परिचय
हिन्दी शब्द की उत्पत्ति:–
फ़ारसी भाषा में ‘स’ का उच्चारण ‘ह’ के रूप में होता है और ‘ध’ का का उच्चारण ‘द’ के रूप में होता है तथा ‘थ‘ का उच्चारण ‘त‘ के रूप में होता है जब मुसलमान सिन्ध में आए थे तो उन्होंने सिन्ध को ‘हिन्द’ कहा, यहाँ की भाषा को ‘हिन्दी’ कहा और सिन्ध के पार के स्थान को ‘हिन्दुस्तान’ कहा था।
अत: हिन्द, हिन्दुस्तान और हिन्दी फ़ारसी भाषा के शब्द हैं।
‘वि + आ+ करण’ के योग से व्याकरण शब्द बना हैं। जिसका शाब्दिक अर्थ है “विशेष रूप से चारो और से भाषा को शुद्ध करने वाला ”
हिंदी व्याकरण की परिभाषा
भाषा के परिष्कृत रूप को ‘व्याकरण’ कहते हैं।
अथवा
जो भाषा के नियमो में आबंध(बांधना) करता है। उसे व्याकरण कहते हैं।
व्याकरण के प्रकार
व्याकरण के दो प्रकार होते हैं :–
1. शब्द व्याकरण 2. पद व्याकरण
शब्द व्याकरण :–
व्याकरण के जिस भाग में शब्दों के संदर्भ में जानकारी प्राप्त की जाती हैं, उन्हें शब्द व्याकरण कहा जाता हैं। जैसे – वर्ण–विचार, संधि, समास, तत्सम्, तद्भव, विदेशी शब्द, देशज शब्द, शब्द युग्म, प्रत्यय, उपसर्ग, अनेकार्थी, पयार्यवाची, विलोम शब्द, शब्द: शुद्ध–अशुद्ध (सही–ग़लत) आदि इत्यादि।
पद व्याकरण :–
व्याकरण के जिस भाग में पदों के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं उस भाग को पद व्याकरण कहते हैं।
जैसे – संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, कारक (परसर्ग), वाक्य, अव्यय, मुहावरा, लोकोक्ति, वाक्य, शुद्ध–अशुद्ध, काल, वृत्ति, वाच्य, पक्ष आदि इत्यादि।
नोट :-
- सयुंक्त व्यंजनों के अलावा ध्वनि या वर्णो का टुकड़ा किया हुआ रूप सर्वाधिक शुद्ध माना गया हैं।
- व्याकरण शब्द तथा पुस्तकों के नाम सदैव पुल्लिंग होते हैं। जैसे :- रामायण
बोली
सीमित क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा सामान्यत: बोली कहलाती है। बोली का मानक व्याकरण व मानक साहित्य नहीं होता उदाहरणार्थ – बघेली, छत्तीसगढ़ी, मारवाड़ी आदि।
विभाषा
विभाषा का क्षेत्र बोली की अपेक्षा बड़ा होता है। विभाषा का आधा-अधूरा व्याकरण व लोक साहित्य होता है। उदाहरणार्थ – ब्रज, अवधी, बुन्देली आदि ।
भाषा
अभिव्यक्ति के माध्यम, अर्थात् विचारों के आदान-प्रदान के साधन को भाषा कहते हैं ।
भाषा विस्तृत क्षेत्र में बोली जाती है। भाषा का मानक व्याकरण एवं मानक साहित्य होता है । भाषा के मुख्यतः दो रूप होते हैं मौखिक भाषा एवं लिखित भाषा ।
राष्ट्रभाषा
राष्ट्रभाषा का शाब्दिक अर्थ है समस्त राष्ट्र में प्रयुक्त होने वाली भाषा, अर्थात् – जो भाषा समस्त राष्ट्र में जन-जन के विचार-विनिमय का माध्यम हो, वह राष्ट्रभाषा कहलाती है। भारत की राष्ट्रभाषा ‘हिन्दी’ (खड़ी बोली) है।
राजभाषा
राजभाषा का शाब्दिक अर्थ है – वह राज-काज की भाषा, अर्थात् जो भाषा देश के राजकीय कार्यों के लिए प्रयुक्त होती है, राजभाषा कहलाती है। राजभाषा को संवैधानिक मान्यता प्राप्त होती है। भारत की राजभाषा ‘हिन्दी’ (खड़ी बोली ) है
भाषा परिवार
विश्व में लगभग 3000 भाषाएं बोली जाती हैं, जिन्हें 13 भाषा परिवारों में वर्गीकृत किया गया है। भारत में बोली जाने वाली विभिन्न भाषाएं 4 भाषा परिवार – भारोपीय, द्रविड़, आस्ट्रिक एवं चीनी-तिब्बती से संबंधित हैं। भारत में बोलने वालों के प्रतिशत के आधार पर भारोपीय परिवार सबसे बड़ा भाषा परिवार है। हिन्दी भारोपीय परिवार की भाषा है । आकृति या रूप के आधार पर हिन्दी वियोगात्मक या विश्लिष्ट भाषा है।
हिन्दी का नामकरण
हिन्दी मूलत: फारसी भाषा का शब्द है। प्राचीनकाल में भारत आने वाले ईरानियों ने सिन्धू नदी एवं इस क्षेत्र के निवासियों की भाषा सिंधी को क्रमशः हिन्दू नदी एवं हिन्दी कहा। इसका कारण यह था कि फारसी में ‘स’ को ‘ह’ एवं ‘ध’ को ‘द’ उच्चारित किया जाता है। इस प्रकार हिन्दी का नामकरण ईरानियों के द्वारा किया गया ।
हिन्दी का वर्गीकरण
सर्वप्रथम अंग्रेज अधिकारी जार्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने 1889 ई. में हिन्दी भाषा का 5 उपभाषाओं व 17 बोलियों में वर्गीकरण प्रस्तुत किया था। इनके द्वारा संपादित पुस्तक का नाम ‘ए लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया’ है।
इनमें से मध्य प्रदेश में बघेली, बुन्देली एवं मालवी बोलियां बोली जाती हैं। बघेली का विकास अर्द्धमागधी अपभ्रंश से, बुन्देली एवं मालवी का विकास शौरसेनी अपभ्रंश से हुआ है।
हिन्दी की संवैधानिक स्थिति
संविधान सभा में हिन्दी को राजभाषा बनाने का प्रस्ताव गोपाल स्वामी आयंगर ने प्रस्तुत किया था। भारतीय संविधान में हिन्दी को राजभाषा की मान्यता 14 सितम्बर, 1949 को प्रदान की गई थी। 14 सितम्बर को प्रतिवर्ष ‘हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारतीय संविधान के भाग- 17 (राजभाषा) में अनुच्छेद 343 से 351 तक तथा अनुच्छेद 120 व 210 में राजभाषा के संदर्भ में महत्वपूर्ण प्रावधान हैं।
अनुच्छेद – 343 संघ की राजभाषा
संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी। संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अन्तर्राष्ट्रीय रूप होगा। इस संविधान के प्रारंभ से 15 वर्ष की अवधि तक उन सभी शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग किया जाता रहेगा।
नोट – इस प्रकार भारत की राजभाषा हिन्दी एवं लिपि देवनागरी है। देवनागरी का विकास ब्राह्मी लिपि से हुआ है। देवनागरी लिपि अक्षरात्मक लिपि (Syllabic Script) है, जबकि अंग्रेजी की रोमन लिपि वर्णनात्मक लिपि (Alphabetic cript) है । की
अनुच्छेद – 344 राजभाषा के संबंध में आयोग और संसद की समिति
राष्ट्रपति संविधान के प्रारंभ से 5 वर्ष की समाप्ति पर तथा तत्पश्चात् प्रत्येक 10 वर्षों की समाप्ति पर राजभाषा आयोग गठित करेगा । साथ ही राजभाषा आयोग की सिफारिशों की परीक्षा करने तथा उन पर अपनी राय का प्रतिवेदन राष्ट्रपति को देने के लिए संसद की राजभाषा समिति का गठन किया जाएगा।
नोट- प्रथम राजभाषा आयोग का गठन 7 जून, 1955 में बालगंगाधर खेर की अध्यक्षता में किया गया था, जिसने राष्ट्रपति को अपनी रिपोर्ट 1956 में प्रस्तुत की थी ।
- अनुच्छेद 345 – राज्य की राजभाषा एवं राजभाषाएं
- अनुच्छेद 346 – एक राज्य और दूसरे राज्य के मध्य या किसी राज्य व संघ के मध्य संचार की भाषा
- अनुच्छेद 347 – किसी राज्य की जनसंख्या के किसी भाग द्वारा बोली जाने वाली भाषा
- अनुच्छेद 348 – उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालयों में और अधिनियमों, विधेयकों आदि के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा
- अनुच्छेद 349 – भाषा संबंधी विधियों के अधिनियमित करने के लिए विशेष प्रक्रिया
- अनुच्छेद 350 – शिकायतों को दूर करने के लिए अभ्यावेदन में प्रयोग की जाने वाली भाषा
- अनुच्छेद 351 – हिन्दी के विकास के लिए निदेश ♦ –
- अनुच्छेद 120 – संसद में प्रयोग की जाने वाली भाषा ♦
- अनुच्छेद 210 – राज्य विधानमण्डल में प्रयोग की जाने वाली भाषा
- आठवीं अनुसूची – भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं को संवैधानिक मान्यता दी गई है । इस अनुसूची में प्रारंभ में 14 भाषाएं थीं, किन्तु 21वें संविधान संशोधन (1967) के द्वारा सिंधी को, 71वें संविधान संशोधन (1992) के द्वारा नेपाली, मणिपुरी व कोंकणी को तथा 92वें संविधान संशोधन (2003) के द्वारा बोडो, डोगरी, मैथिली व संथाली को आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया है। ♦
भाषा के अंग
- भाषा के 3 प्रमुख अंग है- वर्ण, शब्द एवं वाक्य । भाषा की लघुतम इकाई वर्ण है । सार्थक वर्णों के मेल से शब्द बनते हैं तथा शब्दों के मेल से वाक्य बनते हैं। भाषा की सबसे इकाई ध्वनि तथा पूर्ण इकाई वाक्य है ।
ध्वनि, वर्ण और अक्षर
ध्वनि, वर्ण और अक्षर भिन्न-भिन्न अवधारणाएँ हैं। मुँह से उच्चारित अ, आ, क्, ख् आदि ध्वनियाँ हैं। ध्वनियों के लिखित रूप को वर्ण कहते हैं। जिस ध्वनि या ध्वनि समूह का उच्चारण एक श्वास के एक ही आघात में हो जाए तथा जिन्हें विभाजित करने से वे अपना स्वतंत्र अर्थ खो दे, उसे अक्षर कहते हैं । उदाहरणार्थ – ओम्, मेम्, स्नान् आदि । अक्षर ध्वनि का लघुतम रूप होता है।
हिंदी व्याकरण में क्या क्या पढ़ना पड़ता है?
हिंदी व्याकरण से संबंधित विषयों के नोट्स जैसे भाषा, वर्णमाला, संज्ञा, सर्वनाम, संधि, समास, पर्यायवाची, मुहावरे, रस, छंद, अलंकार, कारक, शब्द आदि।
हिंदी व्याकरण का जनक कौन है?
हिन्दी व्याकरण के जनक श्री दामोदर पंडित जी को कहा जाता है
व्याकरण का दूसरा नाम क्या है?
शब्दानुशासन
व्याकरण के कितने अंग होते हैं?
हिंदी व्याकरण के मुख्य तौर पर तीन अंग होते हैं जिनके नाम वर्ण-विचार, शब्द-विचार तथा वाक्य विचार है।