क्रिया किसे कहते हैं? परिभाषा, क्रिया के भेद, शब्द kriya in Hindi

स्वागत है आपका , आज हम इस लेख में हिंदी व्याकरण के महत्वपूर्ण अध्याय क्रिया के विषय में पढ़ेंगे तथा kriya से सम्बंधित प्रश्नो को हल करने का प्रयास करेंगे की किस प्रकार के प्रश्न पूछे जाते है। जैसे क्रिया किसे कहते हैं? क्रिया की परिभाषा, क्रिया के भेद , क्रिया शब्द उदाहरण इत्यादि प्रश्नो का उत्त्तर देने का प्रयास किया गया हैं।

क्रिया

क्रिया शब्द का अर्थ

कृ धातु से बना है जिसका अर्थ है – करना

क्रिया किसे कहते हैं?

जो शब्द किसी कार्य के करने या होने का बोध कराते हैं। उन्हें क्रिया कहते हैं।

क्रिया की परिभाषा :-

वाक्य में प्रयुक्त जिस शब्द अथवा शब्द समूह के द्वारा किसी कार्य के होने अथवा उसकी पूर्णता या अपूर्णता का बोध होता हो, उसे ‘क्रिया’ कहते हैं।

कामताप्रसाद गुरु के अनुसार क्रिया की परिभाषा :-

जिस विकारी शब्द के प्रयोग से हम किसी वस्तु में कुछ विधान करते हैं, उसे क्रिया कहते हैं,

क्रिया के उदाहरण

1. मनीष पढता है। 
2. मनीषा गाना गाती है।
3. बच्चे हँसते है।
4. अध्यापक पढ़ाता है।
5. लड़का सोता है।

विशेष:- 

संस्कृत की मूल धातु के साथ ‘ना’ प्रत्यय का प्रयोग करने से क्रिया का निर्माण है-
जैसे – हँस + ना = हँसना  रो + ना = रोना 
         खा + ना = खाना  चल + ना = चलना
         लिख + ना = लिखना   गा + ना = गाना

क्रिया के भेद (क्रिया का वर्गीकरण)

क्रिया को तीन भागों में बाँटा जाता है-

(क). कर्म के आधार पर-

(1) अकर्मक क्रिया-
(i) पूर्ण अकर्मक क्रिया
(ii) अपूर्ण अकर्मक क्रिया
(2) सकर्मक क्रिया-
(i) एक कर्मक क्रिया
(ii) द्विकर्मक/बहुकर्मक क्रिया

(ख). प्रयोग/रचना के आधार पर-

(1) सामान्य क्रिया
(2) संयुक्त क्रिया
(3) पूर्णकालिक क्रिया
(4) प्रेरणार्थक क्रिया
(5) नामधातु क्रिया
(6) कृदन्त क्रिया
(7) सजातीय क्रिया
(8) सहायक क्रिया

(ग). काल के आधार पर-

(1) भूतकालिक क्रिया
(i) सामान्य भूतकालिक क्रिया
(ii) आसन्न भूतकालिक क्रिया
(iii) पूर्ण भूतकालिक क्रिया
(iv) अपूर्ण भूतकालिक क्रिया
(v) संदिग्ध भूतकालिक क्रिया
(vi) हेतु-हेतुमद भूतकालिक क्रिया
(2) वर्तमान कालिक क्रिया
(i) सामान्य वर्तमान कालिक क्रिया
(ii) अपूर्ण वर्तमान कालिक क्रिया
(iii) संदिग्ध वर्तमान कालिक क्रिया
(iv) संभाव्य वर्तमान कालिक क्रिया
(v) आज्ञार्थक वर्तमान कालिक क्रिया
(3) भविष्यत् कालिक क्रिया
(i) सामान्य भविष्यत् कालिक क्रिया
(ii) संभाव्य भविष्यत् कालिक क्रिया
(iii) आज्ञार्थक भविष्यत् कालिक क्रिया
(iv) हेतु-हेतुमद भविष्यत् कालिक क्रिया

(क). कर्म के आधार पर क्रिया:-

कर्म के आधार पर क्रिया के 2 भेद हैं।

(1) अकर्मक क्रिया:-

जब किसी वाक्य में क्रिया के साथ कर्म प्रयुक्त न हो और क्रिया का प्रभाव वाक्य में प्रयुक्त कर्ता पर पड़े, अकर्मक क्रिया कहलाती है, जैसे-
1. सीता दौड़ती है।
2. बच्चा रोता है।
3. सोहन सोता है।
4. हरीश बैठा है।
5. कुत्ता भौंकता है।
6. कोयल कूकती है।

अकर्मक क्रिया के दो उपभेद होते हैं-

(i) पूर्ण अकर्मक क्रिया:- 

पूर्ण अकर्मक क्रिया में पूरक की आवश्यकता नहीं पड़ती अर्थात् बिना पूरक के ही पूर्ण अर्थ का बोध कराने के कारण पूर्ण अकर्मक क्रिया कहलाती है-
जैसे- 
1. विकास सो रहा है।
2. चिड़िया आकाश में उड़ रही है।
3. वायुयान हवा में उड़ रहा है।
4. लड़के मैदान में दौड़ रहे हैं।

(ii) अपूर्ण अकर्मक क्रिया:-

वे क्रियाएँ जो वाक्य में प्रयुक्त होकर अपना पूर्ण रुप से अर्थ व्यक्त नहीं कर पाती अर्थात् इन्हें कर्म की तो आवश्यकता नहीं होती परन्तु पूरक की इन्हें आवश्यकता होती है, अपूर्ण अकर्मक क्रिया कहलाती है। जैसे
1. आप बहुत चतुर निकले।
2. वह आज स्वस्थ है।
3. मेरा भाई बहुत चालाक है।


 

(2) सकर्मक क्रिया:- 

जब किसी वाक्य में क्रिया के साथ कर्म प्रयुक्त हो अर्थात् जब वाक्य में प्रयुक्त क्रिया का फल कर्ता पर न पड़कर कर्म पर पड़े, सकर्मक क्रिया कहलाती है, जैसे-
1. मोहित पुस्तक पढ़ता है।
2. रमेश गाना गाता है।
3. वह पत्र लिखता है।
4. बच्चे खाना खाते है।
5. कृष्ण बाँसुरी बजाता है।
6. राधा गाना गाती है।

सकर्मक क्रिया के दो भेद होते है-

(i) एक कर्मक क्रिया:-

जब किसी वाक्य में क्रिया के साथ एक कर्म प्रयुक्त हो अर्थात् कर्ता और क्रिया एक कर्म के साथ प्रयुक्त होकर पूरे अर्थ का बोध कराएँ, एक कर्मक क्रिया कहलाती है, जैसे-
1. विजय फुटबॉल खेलता है।
2. सीमा दाना डालती है।
3. देवकी खाना पकाती है।
4. देव प्रेम से खाना खाता है।

(ii) द्विकर्मक क्रिया/बहुकर्मक क्रिया:- 

जब किसी वाक्य में क्रिया के साथ दो या दो से अधिक कर्म प्रयुक्त हो तो वह, द्विकर्मक/बहुकर्मक क्रिया कहलाती है, जैसे-
1. देवकी पक्षियों को दाना डालती है।
2. अध्यापक छात्रों को हिन्दी पढ़ाता है।
3. पिता पुत्र को शिक्षा देता है।
4. माता पुत्री को ज्ञान देती है।

विशेष:- द्विकर्मक क्रिया की पहचान के लिए वाक्य में प्रयुक्त क्रिया से क्या और किसको दोनों के द्वारा प्रश्न किया जाता है, यदि दोनों का उत्तर अलग-अलग मिले तो क्रिया द्विकर्मक/बहुकर्मक होती है।

विशेष:- यदि किसी वाक्य में ‘देने’ का बोध हो रहा हो, और ‘दान’ दिया जा रहा है, तो वहाँ ‘क्या और किसको’ दोनों का उत्तर अलग-अलग मिलने पर भी एक कर्मक क्रिया होती है तथा पहले प्रयुक्त होने वाला कर्म न होकर सम्प्रदान कारक होता है, जैसे
1. रमेश भिखारी को कपड़े देता है।
2. रमेश धोबी को कपड़े देता है।
– भिखारी – सम्प्रदान कारक
कपड़े – कर्म कारक
– धोबी – कर्म कारक
कपड़े – कर्म कारक

1. राजा ब्राह्मण को गाय देता है। 
– एक कर्मक क्रिया
2. मोहन सोहन को पाँच सौ रुपये देता है। 
– एक कर्मक क्रिया
3. मोहन सोहन को पाँच सौ रुपये उधार देता है। 
– द्विकर्मक क्रिया
4. भाई बहन को पाँच सौ रुपये देता है। 
– द्विकर्मक क्रिया
1. ब्राह्मण को – सम्प्रदान कारक
गाय – कर्म कारक
2. सोहन को – सम्प्रदान कारक
पाँच सौ रुपये – कर्म कारक
3. सोहन को – कर्म कारक
पाँच सौ रुपये – कर्म कारक
4. बहन को – कर्म कारक
पाँच सौ रुपये – कर्म कारक

विशेष:- जब किसी वाक्य में दो कर्म प्रयुक्त हो तो जो कर्म पहले प्रयुक्त होता है वह ‘सजीव, परसर्ग सहित और गौण कर्म’ होता है तथा बाद में प्रयुक्त होने वाला कर्म ‘निर्जीव, परसर्ग रहित और मुख्य कर्म’ होता है, जैसे-
हरीश पक्षियों को दाना चुगाता है।
– पक्षियों को – सजीव, परसर्ग सहित, गौण कर्म।
– दाना – निर्जीव, परसर्ग सहित, मुख्य कर्म

अकर्मक और सकर्मक क्रिया की पहचान:-

अकर्मक और सकर्मक क्रिया की पहचान के लिए वाक्य में प्रयुक्त क्रिया से ‘क्रिया’ के द्वारा प्रश्न किया जाता है, यदि क्या का उत्तर मिले, लेकिन कर्ता को छोड़कर मिले तो क्रिया सकर्मक होती है, कर्ता की पहचान के लिए वाक्य में प्रयुक्त क्रिया से ‘कौन’ के द्वारा प्रश्न किया जाता है, यदि ‘कौन’ का उत्तर मिले तो वह कर्ता होता है, और यदि ‘क्या और कौन’ दोनों का उत्तर एक ही मिले तो क्रिया अकर्मक होती है, जैसे-
1. किसान हल से खेत जोतता है।
2. मजदूर नल से पानी भरता है।
3. विकास लाठी से साँप को मारता है।

(ख). प्रयोग/रचना के आधार पर-

(i) सामान्य क्रिया
(ii) संयुक्त क्रिया
(iii) पूर्वकालिक क्रिया
(iv) प्रेरणार्थक क्रिया
(v) नामधातु क्रिया
(vi) कृदन्त क्रिया
(vii) सजातीय क्रिया
(viii) सहायक क्रिया

(i) सामान्य क्रिया:-

जब किसी वाक्य में क्रिया की सामान्य स्थिति का बोध कराया जाता है, सामान्य क्रिया कहलाती है, जैसे-
1. बच्चा रोया।
2. लड़का हँसा।
3. कुत्ता भौंका।
4. मनीष आया।
5. सीमा गई।
6. रेशमा चली।

(ii) संयुक्त क्रिया:- 

जब किसी वाक्य में दो अलग-अलग मूल धातु की क्रियाएँ प्रयुक्त हो, संयुक्त क्रिया कहलाती है, जैसे-
1. सीमा ने खाना खा लिया है।
2. रमेश ने पुस्तक रख दी है।
3. बच्चों ने गृहकार्य पूरा कर लिया है।
4. मिस्त्री ने मकान बना दिया है।

(iii)  पूर्वकालिक क्रिया:- 

जब किसी वाक्य में दो भिन्नार्थक क्रियाएँ प्रयुक्त हो, उनमें से जो क्रिया पहले सम्पन्न होती है, पूर्वकालिक क्रिया कहलाती है, जैसे-
1. सतीश खाना खाकर चला गया।
2. बच्चा दूध पीकर सो गया।
विशेष:- पूर्वकालिक क्रिया की पहचान के लिए वाक्य में प्रयुक्त क्रिया के साथ ‘कर/करके’ जुड़ा रहता है।

(iv) प्रेरणार्थक क्रिया:-

जब किसी वाक्य में कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी और को कार्य करने के लिए प्रेरित करता है, तो वहाँ प्रेरणार्थक क्रिया कहलाती है। जैसे-
1. नितेश, योगी से पत्र लिखवाता है।
2. सीमा, रीमा से खाना पकवाती है।
3. बच्चे, अध्यापक से चित्र बनवाते है।

(v) नामधातु क्रिया:-

जब किसी संज्ञा/सर्वनाम/विशेषण से क्रिया का निर्माण हो अर्थात् संज्ञा/सर्वनाम/विशेषण से बनने वाली क्रिया, नामधातु क्रिया कहलाती है। 
जैसे- लाज – लजाना
 शर्म – शर्माना
 मुस्कुराहट – मुस्कुराना 
 घबराहट – घबराना
 रंग – रंगना/रंगाना
 मेल – मिलना
 अपना – अपनाना 

(vi) कृदन्त क्रिया:- 

जब किसी क्रिया की मूल धातु के साथ प्रत्यय का प्रयोग किया जाए, तो उससे बनने वाली क्रिया, कृदन्त क्रिया कहलाती है, जैसे- चल + ता = चलता
 चल + ना = चलना
 चल + ता = चलकर
 हँस + ना = हँसना
 हँस + ता = हँसता
 हँस + कर = हँसकर

(vii) सजातीय क्रिया:-

जब किसी वाक्य में एक ही मूलधातु से दो क्रियाओं का निर्माण हो रहा हो, तो वे सजातीय क्रिया कहलाती है। 
जैसे- पढ़ – पढ़ाई, पढ़ी। 
लड़ – लड़ाई, लड़ी। 
चढ़ – चढ़ाई, चढ़ी।
1. भारत ने पाकिस्तान से लड़ाई लड़ी
2. मुकेश ने एम.ए. की पढ़ाई पढ़ी
3. संतोष ने पहाड़ की चढ़ाई चढ़ी

(viii) सहायक क्रिया:- 

जब किसी वाक्य में मुख्य क्रिया की सहायता के लिए कोई दूसरी क्रिया प्रयुक्त की जाती हे, लेकिन उसका स्वतंत्र कोई अर्थ नहीं होता, सहायक क्रिया कहलाती है, जैसे- 
1. रोगी ने दवा पी है
2. नानी ने कहानी सुनाई है

(ग) काल के आधार पर क्रिया:-

(1) भूतकालिक क्रिया:-

क्रिया के जिस रुप के द्वारा बीते हुए समय में अर्थात् भूतकाल में किसी कार्य के होने का बोध हो, भूतकालिक क्रिया कहलाती है, जैसे-
1. मोहन ने पुस्तक पढ़ी
2. कृष्ण ने बाँसुरी बजाई
3. राजेश विदेश गया था
4. बच्चे फुटबॉल खेल रहे थे

भूतकालिक क्रिया के छह उपभेद होते है:-

(i) सामान्य भूतकालिक क्रिया-आ/ई/ए’:-

क्रिया के जिस रुप के द्वारा बीते हुए समय में किसी कार्य के होने की सामान्य स्थिति का बोध हो, सामान्य भूतकालिक क्रिया कहलाती है। जैसे-
1. विजय जयपुर गया।
2. मुनेश आगरा गई।
3. बच्चे विद्यालय गए।

(ii) आसन्न भूतकालिक क्रिया-आ/ई/ए+है/हैं:-

क्रिया के जिस रुप के द्वारा बीते हुए समय में तुरन्त ही किसी कार्य के पूर्ण होने का बोध हो, आसन्न भूतकालिक क्रिया कहलाती है। जैसे-
1. मैंने पूजा की है।
2. रमा मंदिर गई है।
3. अविनाश बाजार गया है।
4. पिताजी कार्यालय गए है।

(iii) पूर्ण भूतकालिक क्रिया-‘आ/ई/ए+था/थी/थे’:-

क्रिया के जिस रुप के द्वारा बीते हुए समय में अर्थात् भूतकाल में किसी कार्य के होने में पूर्णता का बोध हो, अर्थात् बहुत पहले ही किसी कार्य के पूर्ण होने का बोध हो, पूर्ण भूतकालिक क्रिया कहलाती है। जैसे-
1. नितेश बाजार गया था।
2. मनु मंदिर गई थी।
3. बच्चे ननिहाल गए थे।
4. चोर घर में घुस चुके थे।
5. वह आगरा पहुँच चुका था।

(iv) अपूर्ण भूतकालिक क्रिया- ‘रहा/रही/रहे+था/थी/थे’:-

क्रिया के जिस रुप के द्वारा बीते हुए समय में किसी कार्य के अपूर्ण होने का बोध हो, अपूर्ण  भूतकालिक क्रिया कहलाती है। जैसे-
1. विकास पुस्तक पढ़ रहा था।
2. रीना भजन गा रही थी।
3. बच्चे झगड़ रहे थे।
4. कुत्ता भौंक रहा था।

(v) संदिग्ध भूतकालिक क्रिया-‘आ/ई/ए+होगा/होगी/होंगे’:-

क्रिया के जिस रुप के द्वारा बीते हुए समय में किसी कार्य के होने में संदिग्धता का बोध हो, संदिग्ध भूतकालिक क्रिया कहलाती है। जैसे-
1. मनोज जोधुर गया होगा।
2. निधि ननिहाल गई होगी।
3. बच्चे विद्यालय गऐ होंगे।
4. वे घर पहुँच गए होंगे।

(vi) हेतु-हेतुमद भूतकाल क्रिया-यदि ……. तो (शर्तवाची):-

जब किसी वाक्य में क्रिया के बीते हुए समय में घटित होने का बोध हो लेकिन एक कार्य दूसरे कार्य पर आश्रित हो, हेतु-हेतुमद भूतकालिक क्रिया कहलाती है। जैसे-
1. यदि आप आते तो ज्यादा मजा आता।
2. यदि बरसात अच्छी होती तो फसल भी अच्छी पकती।
3. यदि कृष्ण बाँसुरी बजाता तो राधा नाचती।

(2) वर्तमानकालिक क्रिया:-

क्रिया के जिस रुप के द्वारा जारी समय में किसी कार्य के होने का बोध हो, वर्तमान कालिक क्रिया कहलाती है, जैसे-
1. जीया पुस्तक पढ़ती है।
2. शिवम गाना गा रहा है।
3. बच्चे फुटबॉल खेल रहे होंगे।
4. मनीष तुम खाना खाओ।

वर्तमान कालिक क्रिया के पाँच भेद होते है:-

(i) सामान्य वर्तमान कालिक क्रिया-‘ता है, ती है, ते है’:-

क्रिया के जिस रुप के द्वारा जारी समय में अर्थात् वर्तमान काल में किसी कार्य के होने में सामान्य स्थिति का बोध हो, सामान्य वर्तमान कालिक क्रिया कहलाती है। जैसे-
1. वह क्रिकेट खेलता है।
2. रेखा पूजा करती है।
3. पूनम पुस्तक पढ़ती है।
4. बच्चे प्रार्थना बोलते है।

(ii) अपूर्ण वर्तमान कालिक क्रिया-‘रहा है/रही है/रहे है’:-

क्रिया के जिस रुप के द्वारा जारी समय में अर्थात् वर्तमान काल में किसी कार्य के जारी रहने अर्थात् अपूर्ण होने का बोध हो, अपूर्ण वर्तमानकालिक क्रिया कहलाती है। जैसे-
1. किसान खेत जोत रहा है।
2. मनीषा कपड़े धो रही है।
3. पिताजी प्रेस कर रहे हैं।
4. नानी कहानी सुना रही है।

(iii)  संदिग्ध वर्तमान कालिक क्रिया-(ता/ती/ते/रहा/रही/रहे+होगा/होगी/होंगे):-

क्रिया के जिस रुप के द्वारा जारी समय में अर्थात् वर्तमान काल में किसी कार्य के होने में संदिग्धता का बोध हो, संदिग्ध वर्तमान कालिक क्रिया कहलाती है। जैसे-
1. रवि पुस्तक पढ़ता होगा।
2. मीनू खाना पका रही होगी।
3. मोनिका सो रही होगी।
4. धोबी कपड़ें धो रहा होगा।

(iv) संभाव्य वर्तमान कालिक क्रिया-((शायद) ता/ती/ते/रहा/रही/रहे+हो/हों):-

क्रिया के जिस रुप के द्वारा जारी समय में अर्थात् वर्तमान काल में किसी कार्य के होने में संभावना का बोध हो, संभाव्य वर्तमान कालिक क्रिया कहलाती है। जैसे-
1. बादल घने काले हो रहे है, शायद कहीं बरसात हो रही है।
2. बाहर शोर हो रहा है, शायद झगड़ा हो रहा हो।
3. पायलों की मधुर ध्वनि आ रही है, ऐसा लगता है राधा नाच रही हो।

(v) आज्ञार्थक वर्तमान कालिक क्रिया-‘ए/ओ’:-

क्रिया के जिस रुप के द्वारा जारी समय में अर्थात् वर्तमान काल में आज्ञा के अर्थ का बोध हो, आज्ञार्थक वर्तमान कालिक क्रिया कहलाती है। जैसे-
1. रहीम तुम पुस्तक पढ़ो।
2. शिवानी तुम खाना पकाओ।
3. उससे कहो, वह अभी चला जाए। 
4. तुम यहाँ आओ।

(3) भविष्यत् कालिक क्रिया:

क्रिया के जिस रुप के द्वारा आने वाले समय में अर्थात् भविष्य में किसी कार्य के होने का बोध हो, भविष्यत् कालिक क्रिया कहलाती है। जैसे-
1. मोनू उदयपुर जाएगा।
2. संतोष पत्र लिखेगा। 
3. शायद वह कल तक आए। 
4. आप घूमने जरुर जाइएगा।

भविष्यत् कालिक क्रिया के चार भेद:-

(i) सामान्य भविष्यत् कालिक क्रिया-‘गा/गी/गे’:- 

क्रिया के जिस रुप के द्वारा आने वाले समय में किसी के कार्य के होने मे सामान्य स्थिति का बोध हो, सामान्य भविष्यत् कालिक क्रिया कहलाती है। जैसे-
1. वह आएगा।
2. हम जाएगें।
3. रीमा खाना पकाएगी।
4. मनोज पतंग उड़ाएगा।
5. सीमा गाना गाएगी।

(ii) संभाव्य भविष्यत् कालिक क्रिया-‘ए/ओ/ऊँ’:-

क्रिया के जिस रुप के द्वारा आने वाले समय में संभावना के अर्थ का बोध हो, संभाव्य भविष्यत् कालिक क्रिया कहलाती है। जैसे-
1. शायद वह कल तक आए।
2. हो सकता है कि कल मैं नहीं आऊँ।
3. बादल घने काले हो रहे हैं शायद बरसात आए।

(iii)  आज्ञार्थक भविष्यत् कालिक क्रिया-आइएगा/जाइएगा’:-

क्रिया के जिस रुप के द्वारा आने वाले समय में आज्ञा के अर्थ का बोध हो, आज्ञार्थक भविष्यत् कालिक क्रिया कहलाती है। जैसे-
1. आप मेरे घर अवश्य आइएगा।
2. तुम भी घूमने जरुर जाइएगा।

(iv)  हेतु-हेतुमद भविष्यत् कालिक क्रिया:-

क्रिया के जिस रुप के द्वारा आने वाले समय अर्थात् भविष्य में किसी कार्य के होने में शर्त का बोध हो अर्थात् एक कार्य दूसरे कार्य पर आश्रित हो हेतु-हेतुमद भविष्यत् कालिक क्रिया कहलाती है। जैसे-
1. यदि बरसात होगी तो फसल भी अच्छी पकेगी।
2. यदि तुम मेहनत करोगे तो अवश्य सफल हो जाओगे।

हिंदी व्याकरण के अध्याय

संज्ञाकारक
सर्वनामवाक्य विचार
विशेषणवाच्य
क्रियाकाल
शब्दअविकारी शब्द
क्रिया विशेषणमुहावरे
संधिलोकोक्तियाँ
लिंगवर्ण विचार
वचनविराम चिन्ह
समासवाक्यांश के लिए एक शब्द
उपसर्गपारिभाषिक शब्दावली
प्रत्ययकारक चिन्ह
अनेकार्थी शब्दविलोम शब्द
तत्सम शब्दतद्भव शब्द
एकार्थक शब्दअन्य सभी लेख

Video Class for Kriya in Hindi

Faq


क्रिया क्या है और उसके भेद?

क्रिया शब्द ‘कृ’ धातु से बना है, जिसका अर्थ होता है- ‘करना’। किसी कार्य के करने या होने का बोध कराने वाले शब्द क्रिया कहलाते हैं।


क्रिया कितने प्रकार के होते हैं?

कर्म के आधार पर-
(1) अकर्मक –
(i) पूर्ण अकर्मक
(ii) अपूर्ण अकर्मक
(2) सकर्मक –
(i) एक कर्मक
(ii) द्विकर्मक/बहुकर्मक
प्रयोग/रचना के आधार पर-
(1) सामान्य
(2) संयुक्त
(3) पूर्णकालिक
(4) प्रेरणार्थक
(5) नामधातु
(6) कृदन्त
(7) सजातीय
(8) सहायक
काल के आधार पर-
(1) भूतकालिक
(i) सामान्य भूतकालिक
(ii) आसन्न भूतकालिक
(iii) पूर्ण भूतकालिक
(iv) अपूर्ण भूतकालिक
(v) संदिग्ध भूतकालिक
(vi) हेतु-हेतुमद भूतकालिक
(2) वर्तमान कालिक
(i) सामान्य वर्तमान कालिक
(ii) अपूर्ण वर्तमान कालिक
(iii) संदिग्ध वर्तमान कालिक
(iv) संभाव्य वर्तमान कालिक
(v) आज्ञार्थक वर्तमान कालिक
(3) भविष्यत् कालिक
(i) सामान्य भविष्यत् कालिक
(ii) संभाव्य भविष्यत् कालिक
(iii) आज्ञार्थक भविष्यत् कालिक
(iv) हेतु-हेतुमद भविष्यत् कालिक

क्रिया in English?

Verb

क्रिया के कितने भेद होते हैं कक्षा 7?

5

महत्वपूर्ण प्रश्न

Q.1
‘नैनीताल में मूसलाधार वर्षा हो रही थी।’ वाक्य में kriya का काल है-

1
आसन्न भूतकाल

2
अपूर्ण भूतकाल

3
सामान्य भूतकाल

4
संदिग्ध भूतकाल

Solution :-
kriya के जिस रूप के द्वारा बीते हुए समय में अर्थात् भूतकाल में तुरन्त ही किसी कार्य के अपूर्ण होने का बोध हो, अपूर्ण भूतकालिक kriya कहलाती है।

Q.2
कृदन्त kriya प्रभावित होती है-

1
पुरुष से

2
लिंग-पुरुष से

3
लिंग-वचन से

4
वचन-पुरुष से

Solution :-
कृदन्त kriya का निर्माण किसी kriya या मूल धातु के साथ प्रत्यय का प्रयोग होता है तब होता है जैसे – चल + ना = चलना।

  • लिंग-पुरुष के अनुसार कृदन्त kriya का प्रयोग होता है जैसे – चलता, चलती आदि।

Q.3
जब किसी वाक्य में एक ही मूल धातु से दो kriyaओं का निर्माण हो तो वह कहलाती है-

1
सहायक kriya

2
सजातीय kriya

3
संयुक्त kriya

4
प्रेरणार्थक kriya

Solution :-
मनोज ने एवरेस्ट की चढ़ाई चढ़ी।

  • चढ़ – चढ़ाई , चढ़ी

Q.4
मुख्य kriya की सहायता करने वाली kriya कहलाती है-

1
सहायक kriya

2
सजातीय kriya

3
संयुक्त kriya

4
प्रेरणार्थक kriya

Solution :-
रोगी ने दवा पी है।

  • ‘ है ‘ यहाँ सहायक kriya है।
    सहायक kriya का अपना स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता है।
    सहायक kriya- सहायक kriya उसे कहते हैं जो kriya-पदबन्ध में मुख्य अर्थ न देकर उसकी सहायक हो।
    जैसे- मैं पढ़ लिया करता हुँ।

Q.5
काल के आधार पर kriya के भेद होते हैं-

1
2

2
3

3
4

4
5

Solution :-
काल के आधार पर kriya के तीन प्रकार होते है- भूतकालिक kriya, वर्तमानकालिक kriya, भविष्यत् कालिक kriya।

Q.6
‘हम बचपन में बहुत खेल खेले थे’ वाक्य में kriya का काल है-

1
आसन्न भूतकाल

2
पूर्ण भूतकाल

3
सामान्य भूतकाल

4
संदिग्ध भूतकाल

Solution :-
kriya के जिस रूप के द्वारा बीते हुए समय में अर्थात् भूतकाल में बहुत पहले ही किसी कार्य के पूर्ण होने का बोध कराया जाए, पूर्ण भूतकालिक kriya कहलाती है।

Q.7
‘अगर तुम थोड़ी मेहनत और करते तो अच्छे अंक आ जाते।’ वाक्य में kriya का काल है-

1
आसन्न भूतकाल

2
पूर्ण भूतकाल

3
हेतु-हेतुमद् भूतकाल

4
संदिग्ध भूतकाल

Solution :-
kriya के जिस रूप के द्वारा बीते हुए समय में अर्थात् भूतकाल में किसी कार्य के होने में शर्त का बोध हो अर्थात् एक कार्य दूसरे कार्य पर निर्भर हो, हेतु-हेतुमद् भूतकालिक kriya कहलाती है।

Q.8
‘मोहन ने पत्र लिया होगा।’ वाक्य में काल है-

1
आसन्न भूतकाल

2
पूर्ण भूतकाल

3
हेतु-हेतुमद् भूतकाल

4
संदिग्ध भूतकाल

Solution :-
kriya के जिस रूप के द्वारा बीते हुए समय में अर्थात् भूतकाल में किसी कार्य के होने में संदिग्धता का बोध हो, संदिग्ध भूतकालिक kriya कहलाती है।

Q.9
‘अमरीका ने हिरोशिमा पर बम गिराया।’ वाक्य में kriya का काल है-

1
आसन्न भूतकाल

2
पूर्ण भूतकाल

3
सामान्य भूतकाल

4
संदिग्ध भूतकाल

Solution :-
kriya के जिस रूप के द्वारा बीते हुए समय में अर्थात् भूतकाल में सामान्य स्थिति का बोध हो, सामान्य भूतकालिक kriya कहलाती है।

Q.10
‘अमरीका ने हिरोशिमा पर बम गिराया है।’ वाक्य में kriya का काल है-

1
आसन्न भूतकाल

2
पूर्ण भूतकाल

3
सामान्य भूतकाल

4
संदिग्ध भूतकाल

Solution :-
kriya के जिस रूप के द्वारा बीते हुए समय में अर्थात् भूतकाल में तुरन्त ही किसी कार्य के होने का बोध हो, आसन्न भूतकालिक kriya कहलाती है।

Q.11
वे kriyaएँ जो संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण से बनती हो, कहलाती है?

1
संयुक्त kriya

2
नामधातु kriya

3
वर्तमानकालिक kriya

4
सकर्मक kriya

Solution :-
नामधातु kriya का निर्माण संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण से होता है। जैसे – सुशांत ने अच्छा दृश्य फिल्माया।

Q.12
kriya के जिस रूप के द्वारा जारी समय में किसी कार्य के होने का बोध हो, कहलाती है?

1
भूतकालिक kriya

2
वर्तमान कालिक kriya

3
भविष्यत् कालिक kriya

4
कोई नहीं

Solution :-
वर्तमान कालिक kriya- kriya के जिस रूप के द्वारा जारी समय में किसी कार्य के होने का बोध हो, वर्तमान कालिक kriya कहलाती है।

Q.13
‘गाय मीठा दूध देती है।’ वाक्य में kriya है:-

1
सामान्य वर्तमान काल

2
अपूर्ण वर्तमान काल

3
संदिग्ध वर्तमान काल

4
संभाव्य वर्तमान काल

Solution :-
kriya के जिस रूप के द्वारा जारी समय में अर्थात् वर्तमान काल में किसी कार्य के होने की सामान्य स्थिति का बोध हो, सामान्य वर्तमान कालिक kriya कहलाती है।

Q.14
‘बच्चे पढ़ रहे है।’ वाक्य में kriya है-

1
सामान्य वर्तमान काल

2
अपूर्ण वर्तमान काल

3
संदिग्ध वर्तमान काल

4
संभाव्य वर्तमान काल

Solution :-
kriya के जिस रूप के द्वारा जारी समय में किसी कार्य के जारी रहने का बोध हो अर्थात् अपूर्ण होने का बोध हो, अपूर्ण वर्तमान कालिक kriya कहलाती है।

Q.15
‘रमेश खेल रहा होगा।’ वाक्य में kriya है-

1
सामान्य वर्तमान काल

2
अपूर्ण वर्तमान काल

3
संदिग्ध वर्तमान काल

4
संभाव्य वर्तमान काल

Solution :-
kriya के जिस रूप के द्वारा जारी समय में किसी कार्य के होने में संदिग्धता का बोध हो, संदिग्ध वर्तमान कालिक kriya कहलाती है।

Q.16
‘शायद मीरा नाच रही हो।’ वाक्य में kriya है-

1
सामान्य वर्तमान काल

2
अपूर्ण वर्तमान काल

3
संदिग्ध वर्तमान काल

4
संभाव्य वर्तमान काल

Solution :-
kriya के जिस रूप के द्वारा जारी समय में किसी कार्य के होने में संभावना का बोध हो, संभाव्य वर्तमान कालिक kriya कहलाती है।

Q.17
‘रामेन्द्र तुम लेख लिखो।’ वाक्य में kriya है-

1
आज्ञार्थक वर्तमान काल

2
अपूर्ण वर्तमान काल

3
संदिग्ध वर्तमान काल

4
संभाव्य वर्तमान काल

Solution :-
kriya के जिस रूप के द्वारा जारी समय में वर्तमान काल में आज्ञा के अर्थ का बोध हो, आज्ञार्थक वर्तमान कालिक kriya कहलाती है।

Q.18
‘वह आएगा।’ वाक्य में kriya है-

1
सामान्य भविष्यत् काल

2
आज्ञार्थक भविष्यत् काल

3
हेतु-हेतुमद भविष्यत् काल

4
संभाव्य भविष्यत् काल

Solution :-
kriya के जिस रूप के द्वारा आने वाले समय में किसी कार्य के होने की सामान्य स्थिति का बोध हो, सामान्य भविष्यत् कालिक kriya कहलाती है।

Q.19
‘शायद पिताजी आएँ।’ वाक्य में kriya है-

1
सामान्य भविष्यत् काल

2
आज्ञार्थक भविष्यत् काल

3
हेतु-हेतुमद भविष्यत् काल

4
संभाव्य भविष्यत् काल

Solution :-
kriya के जिस रूप के द्वारा आने वाले समय में किसी कार्य के होने की सम्भावना का बोध हो, सम्भाव्य भविष्यत् कालिक kriya कहलाती है।

Q.20
‘आप वहाँ किसी से न मिलिएगा।’ वाक्य में kriya है-

1
सामान्य भविष्यत् काल

2
आज्ञार्थक भविष्यत् काल

3
हेतु-हेतुमद भविष्यत् काल

4
संभाव्य भविष्यत् काल

Solution :-
kriya के जिस रूप के द्वारा आने वाले समय में आज्ञा के अर्थ का बोध हो, आज्ञार्थक भविष्यत् कालिक kriya कहलाती है।

Q.21
जिस kriya का फल कर्म पर पड़ता है, उसे ……. कहते है?

1
अकर्मक kriya

2
सकर्मक kriya

3
द्विकर्मक kriya

4
पूर्वकालिक kriya

Solution :-
जब वाक्य में प्रयुक्त kriya कर्म के सहित हो अर्थात् कर्त्ता और kriya कर्म के साथ प्रयुक्त होकर पूरे अर्थ का बोध कराएं सकर्मक kriya कहलाती है। जैसे – कृष्ण बाँसुरी बजाता है।

Q.22
kriya शब्द वह होता है जिससे किसी –

1
कार्य के करने का बोध होता है।

2
कार्य के होने का बोध होता है।

3
स्थिति का बोध होता है।

4
उपर्युक्त सभी

Solution :-
किसी कार्य के करने या होने का बोध कराने वाले शब्द kriya कहलाते हैं। जैसे – पढ़ना, लिखना आदि।

Q.23
‘धातु’ में ‘ना’ जोड़ने पर क्या बनता है?

1
संज्ञा

2
सर्वनाम

3
kriya

4
विशेषण

Solution :-
संस्कृत की मूल धातु के साथ ‘ना’ प्रत्यय का प्रयोग करने से kriya का निर्माण होता है। जैसे – हँस + ना = हँसना

  • खा + ना = खाना

Q.24
सामान्यतया kriya को कितने भागों में बाँटा गया हैं?

1
2

2
3

3
5

4
4

Solution :-
kriya को 3 भागों में बाँटा गया है :-

  1. कर्म के आधार पर kriya
  2. प्रयोग / रचना के आधार पर kriya
  3. काल के आधार पर kriya

Q.25
कर्म के आधार पर kriya के भेद है-

1
2

2
3

3
4

4
5

Solution :-
कर्म के आधार पर kriya को 2 भागों में बाँटा गया हैं-

  1. अकर्मक kriya
  2. सकर्मक kriya

Q.26
kriya सामान्यतया वाक्य में ……..काम करती है-

1
उद्देश्य का

2
विधेय का

3
अव्यय का

4
सभी

Solution :-
kriya वाक्य को पूर्ण बनाती है इसे ही वाक्य का ‘विधेय’ कहा जाता है।

Q.27
अकर्मक kriya वह होती है-

1
जिसका फल कर्म पर पड़ता है।

2
जिस kriya के कर्म की आवश्यकता नहीं होती।

3
जिसका कर्त्ता नहीं होता।

4
उपर्युक्त में से कोई नहीं

Solution :-
जब किसी वाक्य में kriya का फल कर्ता पर पड़े अर्थात् जब किसी वाक्य में कर्त्ता और kriya बिना कर्म के प्रयुक्त होकर भी पूरे अर्थ का बोध कराएं, अकर्मक kriya कहलाती है। जैसे –

  1. बच्चा सोता है।
  2. दिनेश पैदल घूमता है।

Q.28
किस क्रम में अकर्मक kriya नहीं है?

1
युवक टहल रहा है।

2
रमेश ने मुझे पत्र लिखा।

3
हरदेव सोता है।

4
शेखर कार में चलता है।

Solution :-
रमेश ने मुझे पत्र लिखा। वाक्य में ‘पत्र’ कर्म है अत: यह सकर्मक kriya का उदाहरण है। बाकी सभी विकल्प अकर्मक kriya से संबंधित है।

Q.29
जिस विकारी शब्द के प्रयोग से हम किसी वस्तु के विषय में कुछ विधान करते हैं उसे कहते है?

1
संज्ञा

2
सर्वनाम

3
kriya

4
विशेषण

Solution :-
प्रस्तुत परिभाषा पं. कामताप्रसाद गुरु की प्रदत है। ”जिस विकारी शब्द के प्रयोग से हम किसी वस्तु के विषय में विधान करते हैं, kriya कहलाती है। जैसे –

  1. कुत्ता भौंकता है,
  2. महेश पढ़ता है।

Q.30
‘वह लगातार इतनी मेहनत करे तो विद्वान ही हो जाएगा।’ वाक्य में kriya है-

1
सामान्य भविष्यत् काल

2
आज्ञार्थक भविष्यत् काल

3
हेतु-हेतुमद भविष्यत् काल

4
संभाव्य भविष्यत् काल

Solution :-
kriya के जिस रूप के द्वारा आने वाले समय में एक कार्य दूसरे कार्य पर निर्भर हो, हेतु-हेतुमद भविष्यत् कालिक kriya कहलाती है।

Q.31
निम्न में kriya शब्द है-

1
आपको

2
आन्तरिक

3
करना

4
जगत

Solution :-
kriya शब्द संस्कृत की मूल धातु ‘कृ’ से बना है जिसका अर्थ होता है ‘करना’

Q.32
इनमें से किस वाक्य में ‘द्विकर्मक’ kriya का उपयोग हुआ है:-

1
रमेश और मयंक दिल्ली जाएंगे।

2
संगीता ने राधा को पुस्तक दी।

3
अनुराग ने आम व केले खरीदें।

4
विनीता कल से बीमार है।

Solution :-
संगीता ने राधा को पुस्तक दी। प्रस्तुत वाक्य में दो कर्म प्रयुक्त हैं।

  • प्रथम कर्म – राधा
  • द्वितीय कर्म – पुस्तक
  • द्विकर्मक – सकर्मक kriya :- जब वाक्य में दो या दो से अधिक कर्म प्रयुक्त हो तो द्विकर्मक kriya कहलाती हैं। जैसे – विजय पक्षियों को दाना डालता है।

Q.33
‘ किसान हल से खेत जोतता है। ‘ वाक्य में प्रयुक्त kriya है –

1
द्विकर्मक

2
एक कर्मक

3
पूर्ण अकर्मक

4
अपूर्ण अकर्मक

Solution :-
किसान हल से खेत जोतता है। वाक्य की रचना निम्न प्रकार से हुई है :-
किसान – कर्त्ता, हल से – साधन (करण कारक), खेत – कर्म कारक, जोतता है – kriya

  • अत: यह एक कर्मक है।
  • एक कर्मक kriya – जब किसी वाक्य में kriya के साथ एक कर्म प्रयुक्त हो, एककर्मक kriya कहलाती है। जैसे – मीनू खाना पकाती है।

Q.34
द्विकर्मक kriya हेतु सत्य कथन है-

1
वाक्य में प्रयुक्त प्रथम कर्म निर्जीव होता है।

2
वाक्य में प्रयुक्त कर्म मुख्य होता है।

3
वाक्य में प्रयुक्त कर्म सजीव तथा गौण होता है।

4
अ व ब दोनों

Solution :-
जब किसी वाक्य में kriya के साथ दो कर्म प्रयुक्त हो तो जो कर्म पहले प्रयुक्त होता है वह सजीव, परसर्ग सहित और गौण कर्म होता है। जैसे – हरिश ने बच्चो को गाना सुनाया।

Q.35
द्विकर्मक kriya हेतु असत्य कथन है :-

1
वाक्य में प्रयुक्त द्वितीय कर्म निर्जीव होता है।

2
वाक्य में प्रयुक्त द्वितीय कर्म मुख्य कर्म होता है।

3
वाक्य में प्रयुक्त द्वितीय कर्म परसर्ग रहित होता है।

4
वाक्य में प्रयुक्त प्रथम कर्म परसर्ग रहित होता है।

Solution :-
वाक्य में प्रयुक्त द्वितीय कर्म, निर्जीव, परसर्ग रहित और मुख्य कर्म होता है।

  • प्रथम कर्म सजीव, गौण और परसर्ग सहित होता है।

Q.36
‘मोहन हँसा’ वाक्य में kriya है-

1
सामान्य kriya

2
सकर्मक kriya

3
अकर्मक kriya

4
अ व स दोनों

Solution :-
‘मोहन हँसा’ वाक्य में निम्न प्रकार से kriyaएँ है:-

  1. कर्म के आधार पर तो अकर्मक kriya होगी।
  2. प्रयोग / रचना के आधार पर सामान्य kriya होगी।

Q.37
संयुक्त kriya का उदाहरण कौन-सा वाक्य है?

1
रस्सी जल गई।

2
सीता पढ़ रही है।

3
तुम प्रतिदिन पढ़ने आया करो।

4
बच्चा सोता है।

Solution :-
” तुम प्रतिदिन पढ़ने आया करो। वाक्य में संयुक्त kriya प्रयुक्त हुई है।

  • संयुक्त kriya – जब दो या दो से अधिक भिन्नार्थक kriyaएँ मिलकर नवीन kriya का निर्माण करती है, संयुक्त kriya कहलाती है।

Q.38
इनमें से किस वाक्य में पूर्वकालिक kriya प्रयुक्त हुई है?

1
मोहन नहाकर पूजा करने लगा।

2
बालक ने पढ़ाई की।

3
उसने पुस्तक पढ़ी।

4
वह अंग्रेजी फिल्म देख रहा है।

Solution :-
जब एक कार्य समाप्त होकर दूसरा कार्य होता है तो प्रथम कार्य की kriya पूर्वकालिक kriya होती है।

  • मोहन नहाकर पूजा करने लगा।
  • पूर्व कालिक kriya = नहाना

Q.39
प्रेरणार्थक kriya का उदाहरण नहीं है-

1
गोविन्द ने राम को जगवाया।

2
रमेश मजदूर से पेड़ कटवाता है।

3
प्रशांत अनिल से पत्र लिखवाता है।

4
वह खाना खाकर सो गया।

Solution :-
सही विकल्प में (d) पूर्वकालिक kriya प्रयुक्त हुई है।
अन्य तीनों विकल्प (a) (b) (c) प्रेरणार्थक kriya से संबंधित है।

  • प्रेरणार्थक kriya – जब किसी कार्य में कर्त्ता स्वयं कार्य न करके किसी दूसरे से कार्य करवाता है या कार्य करने के लिए प्रेरित करता है तो वहाँ प्रेरणार्थक kriya होगी।

नमस्कार, मेरा नाम अजीतपाल हैं। मैंने हिंदी साहित्य से स्नातक किया है। मेरा शुरूवात से ही हिंदी विषय के प्रति लगाव होने के कारण मैंने हिंदी विषय के बारे में लेखन का कार्य आरभ किया। हाल फ़िलहाल में Pathatu एजुकेशन प्लेटफार्म के लिए लेखन का कार्य कर रहा हूँ।

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